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किसानों को मदद की योजनाएं : पलीता लगा रहे बैंक कर्मचारी

बैंकों के द्वारा किसान लाभार्थियों के पास झूठे और भ्रामक मैसेज भेजे जा रहे हैं. बैंक अधिकारियों की इस मनमानी से किसान परेशान है. पहले तो लोन देने के लिए किसानों के मोबाइल पर मैसेज भेजा जाता है. जब वे बैंक में जाते हैं तो बैंक अधिकारी टका सा जवाब दे देते हैं कि इस तरह का मैसेज हम सब को भेजते रहते हैं. सरकार से जाकर बात करिए. मैसेज भेजना हमारा काम है. लोन देना नहीं.

पलीता लगा रहे बैंक कर्मचारी पलीता लगा रहे बैंक कर्मचारी
Author
नीरज दुबे

प्रयागराज , 28-07-2021



किसानों को तरह-तरह की सुविधाएं देने की घोषणा मोदी सरकार द्वारा की जाती है. इन घोषणाओं के विपरीत बैंक विभाग के अधिकारी व कर्मचारी ही सरकार की योजना को पलीता लगाने में जुटे हैं. बैंकों के द्वारा किसान लाभार्थियों के पास झूठे और भ्रामक मैसेज भेजे जा रहे हैं. बैंक अधिकारियों की इस मनमानी से किसान परेशान है. पहले तो लोन देने के लिए किसानों के मोबाइल पर मैसेज भेजा जाता है. जब वे बैंक में जाते हैं तो बैंक अधिकारी टका सा जवाब दे देते हैं कि इस तरह का मैसेज हम सब को भेजते रहते हैं. सरकार से जाकर बात करिए. मैसेज भेजना हमारा काम है. लोन देना नहीं.

भीषण रूप से परेशान किसानों का कहना है कि बैंकों के द्वारा इस तरह के मैसेज ना भेजे जाएं. अगर भेजा जाए तो लोन देने में आनाकानी न की जाए. बैंकों की इस तरह की कार्यवाही से किसान परेशान हैं. बैंक ऑफ इंडिया नैनी शाखा, प्रयागराज से क्षेत्र के किसानों के पास कर्ज देने के लिए संदेश भेजा गया था. जब बैंक में लोग पहुंचे तो बैंक के कर्मचारियों ने कहा कि यह सब सरकार की झूठी वाहवाही लूटने की चाल है. कहीं कोई लोन नहीं मिल रहा है. मैसेज तो हम सबको भेजते रहते हैं.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि श्री नरेंद्र मोदी जी आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं. किसानों को कर्ज सुलभ कराने का ढिंढोरा पीटा जाता है लेकिन बैंकों की जो कार्यशैली है उसमें सुधार लाने के लिए सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया.
यही कारण है कि बैंक के कर्मचारी किसानों के साथ अमानवीय बर्ताव कर रहे हैं. उनके पास झूठे मैसेज भेज कर उन्हें परेशान कर रहे हैं. किसानों को लांछित किया जा रहा है. बैंक कर्मचारियों की इस हरकत से किसानों में भारी रोष व्याप्त है. बैंक ऑफ इंडिया नैनी शाखा ही नहीं और भी कई बैंकों में यही दुर्दशा का आलम है. कोई भी किसान किसी बैंक में जब लोन लेने के लिए जाता है. तो पहले तो उसे साल 6 महीने तक बैंक वाले इधर उधर दौडाते हैं और बाद में कह देते हैं कि बजट नहीं है.

जो वास्तविक परेशान लोग हैं. जिन्हें सरकारी सहायता की आवश्यकता है. उन्हें बैंकों से कोई मदद नहीं मिल रही है. दलालों के मार्फत तुरंत बैंक से कर्ज मिल जाता है. जो बैंक से सहायता चाहते हैं. बैंक अधिकारी उनकी सुनने को तैयार नहीं. भारत को आत्म निर्भर बनाने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं. इस संबंध में बैंकों का जो रवैया है. वह सोचनीय एवं चिंताजनक है. क्या इस देश के किसान आत्मनिर्भर बन पाएंगे ? किसानों के साथ कर्मचारियों का जो रवैया है उसे नहीं बदला गया तो सरकार की सारी कोशिश धरी की धरी रह जाएगी. किसानों के साथ बहुत भारी अन्याय हो रहा है. मोदी सरकार को इस बारे में तुरंत एक्शन लेना चाहिए. किसानों को कर्ज देने के मामले में जो बैंक अधिकारी दोषी पाए जाएं. उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जाए.

प्रयागराज नैनी यमुनापार क्षेत्र में बैंक अधिकारियों की मनमानी चरम सीमा पर है. खेती किसानी के लिए जो भी किसान लोन के लिए बैंकों में जाता है. उसके साथ यह लोग सीधे मुंह बात नहीं करते. ऐसा बर्ताव करते हैं कि बैंक में जमा पैसा उनकी खानदानी जायदाद है. बैंक कर्मचारियों का किसानों के साथ जो बर्ताव है. उसमें बदलाव लाने की जरूरत है. वास्तविक रूप में किसानों को सही मदद मिलने लगे तो भारत की आर्थिक व्यवस्था उन्नति की ओर तेजी से अग्रसर हो सकती है. मोदी जी टीवी चैनल और अखबारों में चाहे जो बयान बाजी करें. लेकिन सच्चाई क्या है ? मोदी जी द्वारा क्रियान्वित की जा रही सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने में बैंकिंग प्रणाली असफल रही है. चोरबाजारी करने वाले ठगों को को बैंक वाले तुरंत लोन दे देते हैं. जरूरतमंद लोग बैंकों का चक्कर लगा लगा कर थक जाते हैं. उन्हें एक पैसे की सहायता नहीं मिलती.

बैंक अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ किया जा रहा है यह सौतेला बर्ताव एक अक्षम्य अपराध है. इन कर्मचारियों की ड्यूटी है कि यह सही लोगों को चिन्हित करें और उन्हें आर्थिक सहायता दें. इसी को सफल बनाने के लिए सरकार के निर्देश पर मोबाइल के द्वारा बैंक खाता धारको के पास संदेश भेजा जाता है कि आप लोन लेने के लिए बैंक से संपर्क करें लेकिन वास्तविक रूप में ठीक इसके उल्टा हो रहा है. बैंक से मैसेज आने के बाद बैंक जाने पर किसानों के साथ बहुत ही गंदा बर्ताव हो रहा है. बैंक वाले उनकी हंसी उड़ाते हैं. यहां तक कि सरकार के बारे में भी अनाप-शनाप बकने लगते हैं. सरकार को इस तरह की कार्यवाही पर तुरंत रोक लगानी चाहिए.

किसानों के पास या तो सही संदेश भेजा जाए. उन्हें बैंकों के द्वारा सहायता दी जाए. अगर सहायता नहीं देनी है तो उनके पास झूठे मैसेज भेज कर उन्हें परेशान न किया जाए. अपमानित न किया जाए. बैंक में जाने पर उनका उपहास न उड़ाया जाए. सरकार को यह भी देखना होगा कि जो घोषणाएं की जा रही हैं वो धरातल पर लागू हो रही है कि नहीं ? यदि इसी तरह की झूठी मैसेजबाजी चलती रही तो इसका बहुत खराब परिणाम होगा. किसानों के साथ झूठे सन्देश भेज कर जो मजाक किया जा रहा है. उसे तत्काल बंद किया जाए. 


Published: 28-07-2021

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