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लखनऊ से दुबई भेजी गई : सब्जी की पहली खेप

कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा प्रति सप्ताह 10 टन सब्जियों का अरब देशों को किया जाएगा निर्यात, जल्द ही अन्य देशों को भी किया जाएगा सब्जियों का निर्यात, आलू तथा राई, सरसों की फसलों को बीमारियों से बचाने की किसानों से की अपील

सब्जी की पहली खेप सब्जी की पहली खेप

आज सीजन में पहली बार लखनऊ से दुबई के लिए सब्जियों का पहला कन्साइन्मेंट एयर इण्डिया की फ्लाइट से भेजा गया है। इसमें 3 टन भिंडी, 1 टन गाजर, 800 किलो मटर शामिल हैं। जल्द ही गाजर, मटर, मिर्च का भी निर्यात अरब देशों सहित यूरोप के लिए भी किया जायेगा। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि लखनऊ से हर हफ्ते चार कन्साइन्मेंट भेजे जाएंगे।

यह बात आज प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में मीडिया प्रतिनिधियों के सम्मुख कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को देश के अन्य राज्यों तथा विदेशों में बेचकर अच्छा मूल्य दिलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि मा. प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से योगी आदित्यनाथ जी की सरकार ने चार पैक हाउस (लखनऊ, सीतापुर, अमरोहा, वाराणसी) तैयार किये जा रहे हैं। गत वर्ष 2021-23 में 01 लाख 59 हजार 344 मी0टन (लगभग 161 करोड़ रूपये का) निर्यात किया गया था। इस वर्ष अभी तक 99 हजार 528 मी0टन का निर्यात किया जा चुका है। जिसका मूल्य लगभग 112 करोड़ रूपये है। आज की खेप इसके अतिरिक्त है।

उन्होंने कहा कि कृषकों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विभाग तथा मण्डी परिषद द्वारा व्यापक योजना बनायी गयी है। हमारे किसान फल, सब्जियों का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर रहे हैं। जो अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार है। इसलिए शीघ्र ही प्रदेश से निर्यात की मात्रा बढ़ेगी। आगामी दिनों में वाराणसी से भी यूरोप के लिए सब्जियों का निर्यात किये जाने की तैयारी है। इसके लिए वाराणसी में गुणवत्ता प्रयोगशाला शीघ्र शुरू हो जायेगी।

श्री शाही ने बताया कि तापमान में गिरावट एवं आपेक्षिक आर्द्धता में वृद्धि के कारण आलू की फसल में अगेती तथा पछेती झुलसा एवं राई-सरसों में माहू के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि फसलों की नियमित निगरानी के साथ कृषकों को रोगों/कीटों एवं उनके नियंत्रण के सम्बन्ध में जागरुक करने के साथ-साथ जनपद एवं मण्डल में कृषि रक्षा रसायनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करायें।

उन्होंने किसानों से अपील की कि बदलीयुक्त मौसम, 10°-20° सेन्टीग्रेड तापमान एवं 80 प्रतिशत से अधिक अपेक्षिक आर्द्धता की दशा में आलू के अगेती व पछेती झुलसा रोग की सम्भावना बढ़ जाती है। इसके नियंत्रण हेतु मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लू०पी० 2 किग्रा० अथवा कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू०पी० की 2.5 किग्रा की मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 500-750 लीटर पानी में घोलकर सुरक्षात्मक छिडकाव करें।

इसके साथ ही राई-सरसों की खेती करने वाले किसानों से अपील की है कि का माहू कीट से फसलों को बचाने के लिए एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ई०सी० की 2.5 लीटर मात्रा को 400-500 लीटर पानी में घोलकर बनाकर छिड़काव करें। इसके नियंत्रण हेतु कीट की सघनता के अनुसार 10-15 ऐलो स्टिकी ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण हेतु डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई०सी० ऑक्सीडेमेटान-मिथाइल 25 प्रतिशत ई०सी० अथवा क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई०सी० की 1.0 लीटर मात्रा को 600-750 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त कम तापमान के कारण फसलों में पाले की सम्भावना रहती है। जिसके बचाव हेतु खेत में नमी बनाये रखने हेतु हल्की सिंचाई करें।
इस अवसर पर प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण फल, सब्जियों के निर्यात में रुचि रखने वाले कृषकों को विभाग की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। निर्यात से किसानों की आय में वृद्धि होगी।

 


Published: 10-01-2023

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